भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

शिक्षा

शिक्षा पर विभिन्न विचार :-

जॉन ड्यूब ने अनुसार :- “ शिक्षा एक प्रक्रिया है “

विवेकानंद के अनुसार “ मनुष्य में जो सम्पूर्णता गुह्व रूप से विद्यमान है है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है |”

प्लेटो के अनुसार “ देह और आत्मा में अधिक से अधिक जितने सौन्दर्य और जितनी सम्पूर्णता का विकास हो सकता है , उसे संपन्न करना ही शिक्षा का उद्देश्य है |”

महात्मा गाँधी के अनुसार “ यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर एक भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है |”

हर्बर्ट स्पेंसर “ शिक्षा का ध्येय चरित्र निर्माण है |”

एडीसन के अनुसार “ शिक्षा मनुष्य की आत्मा के लिए उसी भांति है जिस प्रकार संगमरमर के लिए शिल्प – कला |”

निराला “ संसार में जितनी प्रकार की प्राप्तियां हैं , शिक्षा उनमें सबसे बढ़कर है |”

प्रेमचंद “ कभी – कभी उन लोगों से भी शिक्षा मिलती है , जिन्हें हम अभिमानवश अज्ञानी समझते हैं |”

जॉन जी हिवन “ शिक्षा जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को निभाने की योग्यता है |”

डोडेट के शब्दों में “ शिक्षा का ध्येय मनुष्य के ज्ञान की वृद्धि करना ही नहीं है , अपितु उसका ध्येय मनुष्य के मष्तिस्क को विकसित करना है |”

रविन्द्रनाथ टैगोर “ मिटटी, पानी और प्रकाश के साथ पूरा – पूरा सम्बन्ध रहे बिना शरीर की शिक्षा सम्पूर्ण नहीं हो सकती |”

अरस्तू “ जिन्होंने मनुष्य पर शासन करने की कला का अध्ययन किया है , उन्हें यह विश्वास हो गया है कि युवकों की शिक्षा पर ही राज्य का भाग्य आधारित है |”

म. ग . मास “ युवकों को यह शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है कि वे अपने सामने सर्वोत्तम आदर्श रखें |”

विवेकानंद के अनुसार “ मनुष्य की अंतर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है |”

शिक्षा के बारे में विभिन्न विचार विशेष तौर पर एक ही बात की ओर इंगित करते हैं वह है मानव का सम्पूर्ण आध्यात्मिक एवं गुणात्मक विकास जो मानव को समाज के हित के लिए सोचने हेतु बाध्य कर दे एवं उनकी सामजिक आवश्यकता को समाज एवं देश के हित में उपयोग कर सके |

शिक्षा पर संस्कृत में विचार :-

१.उद्दमेंन ही सिद्धयन्ति कार्याणि न मनोरथै |
नहि सुप्तस्य सिहंस्य प्रव्शन्ति मुखे मृगा: ||

अर्थात , परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं, मात्र इच्छा करने से नहीं | सोते हुए शेर के मुंह में हिरन स्वयं प्रवेश नहीं करता |

१.तन समर्पित मन समर्पित और यह जीवन समर्पित |
चाहता हूँ देश की धरती तुम्हें कुछ और भी दूं ||
विद्यार्थी को उसके संकीर्ण दायरे से ऊपर उठना होगा | यह कार्य शिक्षा का है | शिक्षा विद्यार्थियों में सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास करे | विद्यार्थी अपनी समस्या के लिए देश को जिम्मेदार न ठहराकर यह सोचें कि देश की समस्याओं को समाप्त करने में उनका क्या योगदान हो सकता है | उन्हें शारीरिक , मानसिक व बौद्धिक दृष्टि से इतना सुदृढ़ बनाया जाए कि वे हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला कर सकें | देश प्रेम की भावना का विकास आज शिक्षा का परम उत्तरदायित्व है |
२.श्री शंकर दिग्विजय
“समाशोभत तेन तत्कुलं स च शीलेन परम व्यरोचन |
अपि शीलं दीपि विद्या विनयेनदिद्यते ||”

१.श्रीमद्भभागवद्गीता
“ ज्ञानम् शास्त्रतः आचार्यतः आत्मादीनाम अवबोधः विज्ञानं विशेषतः तद्नुयवः ||

सूक्तियाँ
• यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।
महात्मा गांधी
• जीवन का रहस्य भोग में नहीं, पर अनुभव के द्वारा शिक्षा-प्राप्ति में है।
विवेकानंद
• कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ गुण हैं।
बालगंगाधर तिलक
• चुनाव जनता को राजनीतिक शिक्षा देने का विश्वविधालय है।
जवाहरलाल नेहरू
• मानव स्वभाव का ज्ञान ही राजनीति-शिक्षा का आदि और अन्त है।
हेनरी एडम
• चरित्रहीन शिक्षा, मानवताविहीन विज्ञान ओर नैतिकताविहीन व्यापार खतरनाक होते हैं।
सत्य साईं बाबा
• अपना आदर्श उपस्थित करके ही दूसरों को सच्ची शिक्षा दी जा सकती है।
• कमज़ोरी का इलाज कमज़ोरी का विचार करना नहीं, पर शक्ति का विचार करना है। मनुष्यों को शक्ति की शिक्षा दो, जो पहले से ही उनमें हैं।
• जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।
• जैसे कोरे काग़ज़ पर ही पत्र लिखे जा सकते हैं, लिखे हुए पर नहीं, उसी प्रकार निर्मल अंत:करण पर ही योग की शिक्षा और साधना अंकित हो सकती है।
• सामाजिक और धार्मिक शिक्षा व्यक्ति को नैतिकता एवं अनैतिकता का पाठ पढ़ाती है।
• मनुष्य को उत्तम शिक्षा अच्चा स्वभाव, धर्म, योगाभ्यास और विज्ञान का सार्थक ग्रहण करके जीवन में सफलता प्राप्त करनी चाहिए।
• प्रतिकूल परिस्थितियों करके ही दूसरों को सच्ची शिक्षा दी जा सकती है।
• शिक्षा का स्थान स्कूल हो सकते हैं, पर दीक्षा का स्थान तो घर ही है।
• लोगों को चाहिए कि इस जगत में मनुष्यता धारण कर उत्तम शिक्षा, अच्छा स्वभाव, धर्म, योग्याभ्यास और विज्ञान का सम्यक ग्रहण करके सुख का प्रयत्न करें, यही जीवन की सफलता है।
• जो कला आत्मा को आत्मदर्शन करने की शिक्षा नहीं देती वह कला नहीं है।
महात्मा गाँधी
• अनुभव-प्राप्ति के लिए काफ़ी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती।
अज्ञात
• अनुभव-प्राप्ति के लिए काफ़ी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती।
अज्ञात
• किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं।
अज्ञात
• चरित्रहीन शिक्षा, मानवता विहीन विज्ञान और नैतिकता विहीन व्यापार ख़तरनाक होते हैं।
सत्य साई बाबा
• सारा हिन्दुस्तान ग़ुलामी में घिरा हुआ नहीं है। जिन्होंने पश्चिमी शिक्षा पाई है और जो उसके पाश में फँस गए हैं, वे ही ग़ुलामी में घिरे हुए हैं।
महात्मा गांधी
• जो कला आत्माी को आत्मादर्शन की शिक्षा नहीं देती, वह कला नहीं है।
महात्मा गांधी
• कष्ट और विपत्ति मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ गुण हैं। जो साहस के साथ उनका सामना करते हैं, वे विजयी होते हैं।
लोकमान्य तिलक
• अंग्रेज़ी माध्यम भारतीय शिक्षा में सबसे बड़ा विघ्न है। सभ्य संसार के किसी भी जन समुदाय की शिक्षा का माध्यम विदेशी भाषा नहीं है।”
मदनमोहन मालवीय
• बच्चों को शिक्षा के साथ यह भी सिखाया जाना चाहिए कि वह मात्र एक व्यक्ति नहीं है, संपूर्ण राष्ट्र की थाती हैं। उससे कुछ भी ग़लत हो जाएगा तो उसकी और उसके परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज और पूरे देश की दुनिया में बदनामी होगी। बचपन से उसे यह सिखाने से उसके मन में यह भावना पैदा होगी कि वह कुछ ऐसा करे जिससे कि देश का नाम रोशन हो। योग-शिक्षा इस मार्ग पर बच्चे को ले जाने में सहायक है।
स्वामी रामदेव
• स्वदेशी उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, ज्ञान, तकनीक, खानपान, भाषा, वेशभूषा एवं स्वाभिमान के बिना विश्व का कोई भी देश महान नहीं बन सकता।
स्वामी रामदेव
• मेरी सारी शिक्षा दो शब्दो की है प्रेम और ध्यान।
आचार्य रजनीश
• ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता। शिक्षा का सार है, मन को एकाग्र करना, तथ्यों का संग्रह करना नहीं।
श्री माँ
• बच्चों को पालना, उन्हें अच्छे व्यवहार की शिक्षा देना भी सेवाकार्य है, क्योंकि यह उनका जीवन सुखी बनाता है।
स्वामी रामसुखदास
• जो शिक्षा मनुष्य को संकीर्ण और स्वावर्थी बना देती है, उसका मूल्यय किसी युग में चाहे जो रहा हो, अब नहीं है।
शरतचंद्र चट्टोपध्याय
• शिक्षा और प्रशिक्षण का एकमात्र उद्देश्य समस्या-समाधान होना चाहिये।
जार्ज बर्नार्ड शा
• शिक्षा की जड़े भले ही कड़वी हों, इसके फल मीठे होते हैं।
अरस्तूक
• जब आप कुछ गंवा बैठते हैं, तो उससे प्राप्त शिक्षा को न गंवाएं।
दलाई लामा
• ख़ाली दिमाग को खुला दिमाग बना देना ही शिक्षा का उद्देश्य है।
फ़ोर्ब्स
• यदि हम असफलता से शिक्षा प्राप्त करते हैं तो वह सफलता ही है।
मैल्कम फोर्ब्स
• शिक्षा का ध्येय है एक ख़ाली दिमाग को खुले दिमाग में बदलना।
मेल्कम फोर्ब्स
• मैं अपने जीवन को एक पेशा नहीं मानता, मैं कर्म में विश्वास रखता हूं, मैं परिस्थितियों से शिक्षा लेता हूं, यह पेशा या नौकरी नहीं है – यह तो जीवन का सार है।
स्टीव जॉब्स, संस्थापक, एप्पल
• औपचारिक शिक्षा आपको जीविकोपार्जन के लिए उपयुक्त बना देती है; स्व शिक्षा (अनुभव) आपका भाग्य बनाती है।
जिन रॉन
• शिक्षा किसी घड़े को भरने जैसा नहीं है, यह तो अग्नि प्रज्ज्वलित करने जैसा है।
डब्लू बी यीट्स
• अगर मनुष्यी कुछ सीखना चाहे तो उसकी हर भूल उसे कुछ न कुछ शिक्षा ज़रूर दे सकती है।
डकेन्सर
• हमें यह शिक्षा दी जानी चाहिए कि हमें किसी कार्य को करने के लिए प्रेरणा की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। कर्म करने से हमेशा प्रेरणा का जन्म होता है, प्रेरणा से शायद ही कर्म की उत्पत्ति होती हो।
फ्रेंक टिबोल्ट
• शिक्षा, राष्ट्र की सस्ती सुरक्षा है।
बर्क
• खेलों के बारे में अकसर ऐसे कहा जाता है मानो यह गंभीर शिक्षा से राहत हो। लेकिन बच्चों के लिए खेल गंभीर शिक्षा ही है। खेल ही वास्तव में बचपन का काम है।
फ्रेड रोजर्स
• सख्त शिक्षा से श्रेष्ठ शिष्य निकलते हैं।
चीनी कहावत
• असफलता से सफलता की शिक्षा मिलती है।
जापनी कहावत
• मैं विश्वास का आदर करता हूं परंतु शंका ही है जो तुम्हें शिक्षा प्राप्त कराती है।
विलसन मिजनर
• मानव जीवन के लिए शिक्षा वैसी ही है, जैसे किसी संगमरमर खंड के लिए मूर्तिकला।
एडिसन
• प्रत्येक मनुष्य जिससे मैं मिलता हूं किसी न किसी रीति में मुझसे श्रेष्ठ होता है, इसलिए मैं उससे कुछ शिक्षा लेता हूं।
एमर्सन
• ग़लती ज्ञान की शिक्षा है। जब तुम ग़लती करो तो उसे बहुत देर तक मत देखो, उसके कारण को ले लो और आगे की ओर देखो। भूत बदला नहीं जा सकता। भविष्य अब भी तुम्हारे हाथ में है।
अज्ञात
• कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है, जिन्हें हम अभिमानवश अज्ञानी समझते हैं।
प्रेमचंद
• शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना है।
सैमुअल स्माइल्स
• नैतिक शिक्षा देते समय संक्षेप में कहो।
होरेस
• सीखे गए को भूल जाने पर भी जो कुछ बच रहता है, वही शिक्षा है।
स्किनर
• बुद्धिमत्ता का लक्ष्य स्वतंत्रता है। संस्कृति का लक्ष्य पूर्णता है। ज्ञान का लक्ष्य प्रेम है। शिक्षा का लक्ष्य चरित्र है।
सत्य साईं बाबा
• हे शक्तिशाली मार्गदर्शक तेरी रक्षण शक्ति और बहु-विधि ज्ञान-शक्ति से तू हमें उत्तम शिक्षा दे। हमें अवगुण, क्षुधा और व्याधि से मुक्त कर।
ऋग्वेद
• बुद्धिमत्ता का लक्ष्य स्वतंत्रता है। संस्कृति का लक्ष्य पूर्णता है। ज्ञान का लक्ष्य प्रेम है। शिक्षा का लक्ष्य चरित्र है।
सत्य साईं बाबा
• हर व्यक्ति में दिव्यता का कुछ अंश है, कुछ विशेषता है- शिक्षा का यही कार्य है कि वह इसको खोज निकाले।
अरविंद
• पृथ्वी में कुआं जितना ही गहरा खुदेगा, उतना ही अधिक जल निकलेगा। वैसे ही मानव की जितनी शिक्षा होगी, उतनी ही तीव्र बुद्धि बनेगी।
तिरुवल्लुवर
• योग्य शिष्य को जो शिक्षा दी जाती है, वह अवश्य फलती है।
कालिदास
• सदाचार और निर्मल जीवन सच्ची शिक्षा का आधार है।
महात्मा गांधी
• शिक्षा केवल ज्ञान-दान नहीं करती, वह संस्कार और सुरुचि के अंकुरों का पालन भी करती है।
अज्ञात
• यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल कुछ न कुछ शिक्षा दे सकती है।
डिकेंस
• अहंकार, क्रोध, प्रमाद, रोग और आलस्य- इन पांच कारणों से व्यक्ति शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता।
उत्तराध्ययन