भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

उद्देश्य

न्यास के उदेष्य

  • भारतीय संस्कृति एवं जीवनादर्षों के अनुरूप शिक्षा दर्शन विकसित करना जिससे अनुप्राणित होकर शिक्षा के लिये समर्पित कार्यकर्ता राष्ट्र के पुनर्निमाण के पावन लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में विश्वासपूर्वक बढ़ सकें।
  • शिक्षा का ऐसा स्वरूप विकसित करना जिसके माध्यम से भारत की अमूल्य आध्यात्मिक निधि, परम सत्य के अनुसंधान में पूर्व पुरूषों के अनुभव एवं गौरवशाली परंपराओं की राष्ट्रीय थाती को वर्तमान पीढ़ी को सौंपा जा सके और उसकी समृद्धि में वह अपना योगदान करने में समर्थ हो सकें।
  • आधुनिकतम ज्ञान, विज्ञान तथा प्राचीन उपलब्धियों का पूर्ण उपयोग करते हुए ऐसी शिक्षण प्रणाली एवं संसाधनों को विकसित करना है जिससे छात्रों के सर्वांगीण विकास के शैक्षिक उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति सुलभ हो सके।
  • आधारभूत एवं व्यावहारिक अनुसंधान एवं विकास के कार्यक्रमों का संचालन एवं निर्देशन करना तथा भारतीय मनोविज्ञान को शिक्षण प्रक्रिया का आधार बनाने हेतु कार्य करना।
  • राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर की शैक्षिक संगोष्ठियाँ एवं परिचर्चायें आयोजित करना तथा शिक्षाविदों एवं विचारकों का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त करना।
  • भारत सरकार की राष्ट्रीय शैक्षिक योजनाओं एवं कार्यक्रमों में आवश्यक सहयोग एवं परामर्श प्रदान करना।
  • देश-विदेश में चल रहे शैक्षिक प्रयोगों एवं अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में कार्य करना एवं उनसे सक्रिय सम्पर्क स्थापित करना।
  • शिक्षा के क्षेत्र में आ रही विकृतियों, भूमण्डलीकरण के परिणाम स्वरूप पाश्चात्यीकरण संस्कृति पर कुठाराघात, जीवन मूल्यों का ह्रास, देश विच्छेदी प्रयासों का विरोध करना।
  • शिक्षा क्षेत्र में वैकल्पिक संरचना स्थापित करने के लिये विधिवत कार्य करना।
  • प्रदर्शनियों, संगोष्ठियों, प्रवचनों, दृश्य-मुद्रिकाओं (वीडियो कैसेट) प्रकाशन तथा भाषण-मालाओं के माध्यम से जन-जागरण तथा सामाजिक दायित्व-बोध जगाना और उनमें इस कार्य हेतु सर्वाधिक सहयोग तथा सहायता प्राप्त करना।

उक्त उदेश्यों की पूर्ति हेतु ऐसे सभी विधि सम्मत कार्य करना जो न्यासियों की दृष्टि में आवश्यक हों।